December 6, 2022
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मरवाही वन मण्डल के मरवाही, गौरेला, पेन्ड्रा और खोडरी वनपरिक्षेत्र में जमकर घोटाला, फर्जी देयक भुगतान का मामला, आर0टी0आई0 के जरिये मांगा गया दस्तावेज, और बैंक स्टेटमेन्ट के ट्रांजेक्सन दस्तातेजों की छायाप्रति, एक महीने में जानकारी नहीं देने पर मामला सीधा हाई कोर्ट में प्रस्तुत करने की तैयारी।

साजिद अख्तर-

एडीटर इन चीफ (THE PRESS TV)

(मोबाईन न0-06268465145)

मरवाही पेन्ड्रा गौरेला
सूत्र ने बताया कि वन मण्डलाधिकारी की पोस्ट पर एक एसडीओ की पदस्थापना ही गलत तरीके से की गई है जिसकी शिकायत राज्यपाल और महालेखाकार के समक्ष करने की बात सामने आ रही है। नियमतः रिटायर्ड होने वाले अफसरों से 6 माह पूर्व ही वित्तीय प्रभार समाप्त कर दिया जाता है परन्तु यहां एसा नही है। करप्सन फ्री राज्य का सपना देखने वाले मुख्यमंत्री श्री भूपेस बघेल के आदेशो की धज्जीयां उड़ाई जा रही है। एक रेन्जर वर्तमान में एसडीओ0 जिनका नाम  संजय त्रिपाठी बताया जाता है जो 2014 से यहां पर जमे हुए इनके कार्यकाल में करोड़ों रूपयों का घोटाला हो चूका है? ये अपनी पहूंच वनमन्त्री मो0 अकबर तक बताते है और कहते है कि मेरा तत्कालीन वनमन्त्री मो0 अकबर से घरेलू सम्बन्ध है? इनकी पहूंच का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करोड़ो का घोटाला करने के बावजूद आज दिनांक तक ना तो महालेखाकार और ना ही वनमन्त्रालय, ना ही एसीबी, ना ही ईओडब्ल्यू इन तक पहुंच सका है, कारण साफ है सत्ता में पहूंचं, जिसका फायदा यह आज तक उठाते आए है। 2014 से 2021 तक इनके वन परिक्षेत्र मरवाही में जितने भी कार्य हूए है चाहे पौधा रोपड़ से निर्माण कार्य हो खरीदी हो या फिर समीतियों के नाम पर फर्जी देयक भूगतान हो अगर इमानदारी से जांच कर दी जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा?

2020 file pick.

रही बात यहां हम बात कर रहे है एक डीएफओ जिनकी योग्यता तो एसडीओ0 है परन्तु इनको भी डीएफओ0 बनाकर यहां पर बैठा दिया गया है। इनके द्वारा जमकर सप्लायरों और ठैकेदारों से मिलकर चांदी काटने में व्यस्त है?

मरवाही वन मण्डल के मुख्यतः सभी चारों रेंजो में वित्तीय वर्ष 2019-20,  2020-21 में फर्जी देयक भुगतान प्रमाणको से शासन को लाखों रुपयों का चूना लगाने का काम किया जा रहा। सूत्रों की माने तो एडवांस भुगतान प्रमाणक के चेक काटे जा चूके है जिससे बजट लेप्स ना हो जाये, और कार्य का कुछ अता पता नहीं है।

मरवाही, पेन्ड्रा, गौरेला और खोडरी ऐसे वनपरिक्षेत्र है जो मुख्यतः वनों से आच्छादित है। यहां पर जंगलो के भीतर क्या हो रहा है इससे शासन में बैठे उच्चाधिकारियों को कोई लेना देना नही है, बस उनको कमीशन पहुँच जाए उनके लिए इतना ही काफी है।
पूर्व में इस वनमण्डल में गोबर खाद घोटाला एक प्रमुख मूद्वा था जिसकी जांच को कूछ चन्द लालची अधिकारियों ने अपनी लालच से मामले को दबा दिया या यो कहिए कि जांच ही नहीं हुई अगर हुई तो सिर्फ फाईलों मे हुई। वर्तमान में भी गोबर खाद खरीदी हुई है जिसमें तत्कालीन डीएफओ की भूमिका संदिग्ध है? जिसकी शिकायत जल्द होने की बात कही जा रही है।
मार्च का महीना डीएफओ, एसडीओ, और प्रभारी रेंजरों के लिए स्वर्ण महीना माना जाता है इसमें प्रत्येक रेंज में लाखो रुपयों का वारा न्यारा हो जाता है। फर्जी देयक भुगतान बनाकर डीएफओ के माध्यम से चेक आहरण कर अपना अपना हिस्सा बांट लिया जाता है, कुछ हिस्सा मंत्री सन्तरी, और अपने उच्चाधिकारियों को पहुँचा दिया जाता है।


फर्जी प्रमाणको में फर्जी खरीदी-गोबर खाद, बीज, पौधे , यूरिया, निम खली, बोनमिल, रासायनिक इत्यादि को सिर्फ कागजों तक मे सीमित करके रखा जाता है। दिखावे के लिए कुछ मात्रा में खरीद भी लिया जाता है,पहुच वाले प्लांटेशन में कुछ मात्रा में इन चीजो को डाल भी दिया है, बाकी का अंदर कर लिया जाता है, निर्माण कार्य में लगने वाले सामग्रियों में भी इसी प्रकार किया जाता है। हमने इस मामले में आरटीआई के जरिये जानकारी वनमंडल से मांगी है, अभी मार्च 2021 के खत्म होने का इंतजार किया जा रहा है उसके बाद इन रेंजरों और इनके आला अधिकारियों को सबूत सहित बेनकाब किया जाएगा। इस मामले में हमने आने वाले विधानसभा सत्र के लिए दस्तावेज इकठ्ठा करके नेताप्रतिपक्ष को सौंप कर सवाल के जरिये जवाब मांगा जाएगा। देखने में यह भी आया है कि स्थानीय पत्रकारों को 5 हजार से लेकर 10 हजार तक होली का लिफाफा बांटा गया है? आखिर यह पैसा क्या इनके बाप दादाओ ने वनमण्डल के तीजोरी में बंद करके गए है करीब 20 से 25 लाख रूपए नेताओ और पत्रकारो को बांट दिए गए है जिसकी जांच होनी अतिआवश्यक है? इन जैसे अधिकारियों ने देश का बेड़ा गर्ग कर रखा है। ये ऐसे अधिकारी है जो दीमक से भी खतरनाक है इन जैसे अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही और रिकवरी जरूर होना चाहिए?

सूचना का अधिकार में डीएफओ मरवाही इतने डरते है कि जानकारी देने में इनकी नानी मरती है ’अगर इमानदार हो तो डर कैसा’ मर्द के बच्चे हो तो जानकारी दो, अगर भ्रष्ट हो तो जानकारी बिलकूल नहीं देना।

बिलासपूर के एक रिटायर्ड जज ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि वनमण्डल का कोई भी प्रमाणक उठाकर देख लो अगर आर0टी0आई0 कार्यकर्ता चाहे तो हर प्रमाणकों में इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है और इनको जेल की सलाखों के पीछे डाला जा सकता है।

मरवाही वनण्मडल की अगली कड़ी जल्द……………

  • हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा मामला-इस मामले में जल्द ही हाईकोर्ट में मामला प्रस्तुत किया जाएगा वनमन्त्रालय सहित, उन समस्त अधिकारियों को पार्टी बनाई जाएगी जो इस मामले में संलिप्त है।

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