January 27, 2022
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रॉ मटेरियल देने के लिए कैसे राजी हुआ अमेरिका:प्रभावशाली भारतीयों और कई अमेरिकी सांसदों ने बाइडेन पर दबाब बनाया, जिसके चलते वैक्सीन के रॉ मटेरियल से प्रतिबंध हटा

भारत में कोरोना के भयावह हालात के बावजूद दो दिन पहले तक अमेरिका वैक्सीन उत्पादन के लिए रॉ मैटेरियल देने को तैयार नहीं था। इसे लेकर अमेरिका में भी जो बाइडेन प्रशासन की आलोचना शुरू हो गई थी। इस बीच, अमेरिका में रहने वाले प्रभावशाली भारतीयों, कई अमेरिकी सांसदों और राष्ट्रपति के चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉ. एंथनी फाउची ने भी मदद का हाथ बढ़ाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाया। भारत सरकार भी कूटनीतिक स्तर पर इसके लिए प्रयास कर रही थी। इस बीच, बाइडेन प्रशासन ने रविवार को सारी पाबंदियां हटाते हुए भारत की मदद का ऐलान किया।

16 अप्रैल को सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने राष्ट्रपति बाइडेन से वैक्सीन उत्पादन के लिए जरूरी रॉ मटेरियल के निर्यात से प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। इसके बावजूद राष्ट्रपति ने रियायत नहीं दी। इस बीच, ताकतवर अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स, हेली स्टीवेंस और राशिदा तलैब ने बाइडेन प्रशासन पर भारत की मदद के लिए दबाव बनाया। डेमोक्रेट सांसद एड मार्के ने कहा, अमेरिका के पास जरूरत के हिसाब से पर्याप्त वैक्सीन है, उसे भारत जैसे देशों की मदद करनी चाहिए।

इससे पहले भारत सरकार ने कई बार अमेरिका सरकार से प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया था। अमेरिका में भारतीय राजदूत तरणजीत संधू लगातार बाइडेन प्रशासन के संपर्क में रहे। अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी फोन पर चर्चा की। इसके बावजूद पिछले हफ्ते अमेरिका ने भारत के आग्रह को मानने से इनकार कर दिया। अमेरिका ने तर्क दिया था कि वह पहले देश की जरूरतों को प्राथमिकता देगा।

भारत में हालात बिगड़ने पर बन रहा था दबाव

ट्रम्प प्रशासन ने लागू किया था कानून, बाइडेन ने भी जारी रखा

बीते नवंबर में फाइजर ने रॉ मैटेरियल की कमी का हवाला देकर टीका का उत्पादन आधा कर दिया था। तब ट्रम्प ने रक्षा उत्पादन कानून लागू किया। यह कानून कंपनियों को घरेलू उपयोग के लिए वैक्सीन और पीपीई किट देने के लिए बाध्य करता है। वहीं कंपनियां कच्ची सामग्री निर्यात नहीं कर सकतीं। बाइडेन प्रशासन ने भी इसे लागू रखा। नोवावैक्स के अधिकारियों ने दैनिक भास्कर से कहा, प्रतिबंध से भारत में वैक्सीन का उत्पादन प्रभावित होगा।

दूसरे देशों से कच्चा माल लेने में कई अड़चनें, प्रक्रिया भी लंबी
सीरम द्वारा अमेरिका से आयात कच्चे माल में फिल्टर्स, प्लास्टिक बैग और एडजुवेंट हैं। बैग का इस्तेमाल वैक्सीन सेल्स के डेवलपमेंट में होता है। वहीं, एडजुवेंट इम्यून सिस्टम को एंटीबॉडी विकसित करने में मदद करता है। नोवावैक्स के अनुसार फिल्टर और बैग अन्य देशों से मंगा सकते हैं, पर एडजुवेंट वेंडर बदलने में समय लगता है। वेंडर बदलने का अर्थ होगा कि नए सिरे से क्लीनिकल ट्रायल करे। इससे वैक्सीन का उत्पादन प्रभावित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी और बाइडेन के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
पीएम नरेंद्र मोदी और बाइडेन के बीच सोमवार को फोन पर बात हुई। माेदी ने बताया कि उन्होंने बाइडेन को मदद के लिए धन्यवाद दिया, साथ ही वैक्सीन के कच्चा माल और दवाओं की सप्लाई चेन कारगर बनाने पर चर्चा हुई। भारत और अमेरिका की हेल्थकेयर पार्टनरशिप कोविड-19 से पैदा हुई चुनौतियों का मुकाबला कर सकती है।

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