December 6, 2022
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लॉकडाउन में थोक विक्रेताओं ने अल्फांसो नहीं खरीदे तो किसानों ने बनाया नेटवर्क, एक किसान ने ही डेढ़ लाख आम बेच दो करोड़ कमाए

औरंगाबाद
कोंकण में हर साल 2.75 लाख टन अल्फांसो होता है, इस बार भाव भी कम।
  • बाग मालिकाें ने 5 दिनों में डिलीवरी की गारंटी दी, 15 हजार पिन कोड पर माल पहुंचाया
  • हरेक आम पर क्यूआर कोडिंग, ताकि क्वालिटी पर भरोसा हो

लाॅकडाउन के कारण आम का स्वाद नहीं ले पा रहे हैं, तो परेशान न हों। इस बार कोंकण के बाग मालिकों ने ‘अल्फांसो’ यानी हापुस का ऑनलाइन ऑर्डर लेना शुरू कर दिया है और होम डिलीवरी की जा रही है। दरअसल, देशभर के अलग-अलग हिस्सों में लॉकडाउन के कारण थोक विक्रेता माल नहीं उठा रहे हैं, इससे परेशान होकर बाग मालिकों ने अपना नेटवर्क बनाकर अल्फांसो आम ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया है। बाग मालिक प्रशांत पावले कहते हैं- ‘हम अपने नेटवर्क से महानगरों में रहने वालों को दो दिन में ही आम पहुंचा सकते हैं। पिछले 50 दिनों में मैंने डेढ़ लाख आम ऑनलाइन बेचे और 2 करोड़ रुपए कमाए।’

प्रशांत कहते हैं- ‘अल्फांसों की क्वालिटी के कारण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इसे दूसरे फलों की तरह नहीं बेचा सकता। हम इसे ऑर्डर लेने के तीन-चार दिन पहले ही घास में रखकर पकाते हैं, वह भी बिना किसी रसायन के। हम इसे ग्राहक तक पहुंचाने से पहले सुनिश्चित कर लेते हैं, इसकी क्वालिटी पर कोई असर न पड़े।’ इस साल खुद की वेबसाइट बनाकर लोगों तक हापुस पहुंचाने वाले निखिल खानविल्कर बताते हैं कि ‘हम हरेक अल्फांसो पर क्यूआर कोडिंग स्टीकर पेस्ट करते हैं, ताकि ग्राहकों को भरोसा हो कि यही असली अल्फांसो है। वरना, खुले बाजार में तो पेटी में केसर या दूसरी साधारण किस्मों को मिलाकर इसे आसानी से बेच दिया जाता है।’

इधर, शीतल रूद्रावार ने बताया कि पिछले साल के अनुभव से सीख लेते हुए इस साल दिसंबर से ही बाग मालिक जागरूक हो गए। सोशल मीडिया पर अपना खुद का नेटवर्क तैयार किया। सैकड़ों ग्रुप और पेजेस बनाकर ऑनलाइन ऑर्डर लेने लगे। आम उत्पादक और सहकारी समितियां भी कोरोना की दूसरी लहर के चलते ऑनलाइन बिक्री पर सहमत हो गईं। दो से पांच दिनों में माल पहुंचाने की गारंटी पर हमने देश के 15 हजार से अधिक पिन कोड पर अल्फांसो की डिलीवरी की।

कोंकण में हर साल 2.75 लाख टन अल्फांसो होता है, इस बार भाव भी कम

कोंकण इलाके में हर साल आम की 2.75 लाख टन पैदावार होती है। इनमें से छह हजार टन आम निर्यात कर दिए जाते हैं। चूंकि इस बार निर्यात नहीं हाे रहा है, इसलिए भाव भी काफी कम हैं। इस बार पांच दर्जन यानी 60 आम की पेटी 4000 रुपए तक बिक रही हैं जो पहले 6 हजार रुपए तक बिकती थी।

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