December 6, 2022
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मणिपुर: असम राइफल्स के मेजर ने कथित तौर पर ग्रामीण को गोली मारी, पुलिस करेगी जांच

मणिपुर के कंगपोकपी ज़िले के चालवा गांव का मामला. बीते तीन जून की देर रात 44 असम राइफल्स के मेजर अपने तीन जवानों के साथ एक ऑपरेशन को अंजाम देने पहुंचे थे. इसी दौरान उन्होंने गांव के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया, जो बाद में गोली लगने के कारण घायल अवस्था में मिले. अस्पताल ले जाते वक़्त उनकी मौत हो गई थी.

नई दिल्ली: मणिपुर के कंगपोकपी जिले के एक गांव में बीते बीते तीन जून को कथित तौर पर असम राइफल्स के जवान की गोली से एक व्यक्ति की मौत हो गई. इसके चलते गुस्साए स्थानीय लोगों ने अर्धसैनिक बल के कैंप को क्षतिग्रस्त कर दिया. पुलिस ने बीते शनिवार को यह जानकारी दी.

असम राइफल्स के वाहन में आग लगाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. हालांकि, अधिकारियों ने इस वीडियो की पुष्टि नहीं की है.

पुलिस अधीक्षक पी. गोलुंगमुओन सिंगसित ने कहा कि व्यक्ति को तीन जून की रात को चालवा गांव में गोली लगी और उपचार के लिए राजधानी इम्फाल ले जाने के दौरान शनिवार तड़के उनकी मौत हो गई.

उन्होंने कहा कि अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि गांव में इस घटना के पीछे क्या कारण रहा? पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गोलीबारी की घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों का एक समूह असम राइफल्स के कैंप में पहुंचा और आरोपी को उन्हें सौंपने की मांग की.

उन्होंने कहा कि शनिवार सुबह तक इलाके में स्थिति तनावपूर्ण थी. हालांकि, बाद में पुलिस ने हालात को काबू किया.

अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में कंगपोकपी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है. वहीं, असम राइफल्स के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चालवा के ग्रामीणों ने बताया कि 44 असम राइफल्स के मेजर अपने तीन जवानों के साथ तीन जून की देर रात एक ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए आए थे.

इस दौरान असम राइफल्स के कर्मचारियों ने कथित तौर पर एक ग्रामीण, जिसकी पहचान मांगबोइलाल ल्होवुम के रूप में हुई है, को उठा लिया और बाद में वह गोली लगने के कारण सड़क के किनारे घायल अवस्था में मिले. 

उन्हें पास जन स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, वहां से उन्हें कंगपोकपी जिला मुख्यालय के एक अस्पताल के लिए रिफर कर दिया था. हालांकि रास्ते में ही उनकी जान चली गई.

इस घटना के बाद से इलाके में तनाव बढ़ गया. गांववालों समेत विभिन्न नागरिक संगठनों के दबाव के बाद मेजर को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था.

हालांकि शनिवार को नागरिक संगठनों, असम राइफल प्रशासन और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद तीनों पक्षों के बीच सहमति बनने पर यह तनाव खत्म हो गया.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि तीनों पक्ष राज्य पुलिस द्वारा हत्या की घटना की जांच करने और जिले से 44 असम राइफल्स चौकी को हटाने के लिए सहमत हुए हैं.

इसके अलावा असम राइफल्स ने पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये की राशि प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है.

समझौते पर संयुक्त रूप से कमांडर 22 सेक्टर एआर ब्रिगेडियर पीएस अरोड़ा, महासचिव-कुकी इंपी कांगपोकपी (केआईके) थांगमिनलेन किपजेन, मणिपुर पुलिस के एडीजीपी, कुकी छात्र संगठन के महासचिव थांगटिनलेन हाओकिप समेत अन्य लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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