November 27, 2022
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धर्म मध्य प्रदेश राज्य विशेष

गृहमंत्री बोले- MP में अंडा का फंडा नहीं चलने देंगे:बाल संप्रेषण गृह में चिकन और अंडा परोसने का आदेश जारी; नरोत्तम मिश्रा ने ली आपत्ति

मध्यप्रदेश में बाल आश्रय और बाल संप्रेषण गृहों में रहने वाले बच्चों को खाने में अंडा और चिकन देने के आदेश के बाद दो विभाग आमने-सामने आ गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने 25 अगस्त को इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया। इस पर गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मप्र में अंडे का फंडा नहीं चलेगा। इसे किसी भी हालत में चलने नहीं देंगे। गृहमंत्री के बयान के बाद दोनों विभाग के अफसर पसोपेश में पड़ गए हैं। इस मामले में दोनों विभाग के अफसरों ने चुप्पी साध ली है।

25 को जारी हुआ गजट नोटिफिकेशन
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बीते 25 अगस्त को बाल सुधार गृह, आश्रय गृह में रहने वाले बच्चों की देखभाल को लेकर करीब 681 पेजों का आदेश मप्र के राजपत्र में प्रकाशित किया है। गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से जब बच्चों को अंडा और चिकन देने के फैसले के बारे में पूछा गया तो वे बोले- ये जो विषय आया है इससे भ्रम की स्थिति है। ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं हैं और इसे लागू भी नहीं किया जाएगा। किसी राजपत्र में ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित नहीं हुई है।

25 अगस्त के गजट में बच्चों को सप्ताह में अंडा और चिकन देने का जिक्र किया गया है। अब गृहमंत्री का कहना है कि मप्र में अंडे का फंडा नहीं चलेगा।
25 अगस्त के गजट में बच्चों को सप्ताह में अंडा और चिकन देने का जिक्र किया गया है। अब गृहमंत्री का कहना है कि मप्र में अंडे का फंडा नहीं चलेगा।

कमलनाथ सरकार के फैसले पर मचा था बवाल

दो साल पहले कमलनाथ सरकार के दौरान तत्कालीन महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री इमरती देवी ने आंगनबाड़ियों में बच्चों को अंडा देने की सिफारिश की थी। इसके बाद इस मामले पर बवाल मच गया था। हालांकि, चौतरफा विरोध के बाद महिला बाल विकास विभाग ने इस फैसले को लागू नहीं किया था। इमरती बीजेपी ज्वाइन करने के बाद भी बच्चों को अंडा देने की बात दोहरा चुकी हैं।

2015 में भी चिकन-अंडे देने का नियम, लेकिन परोसा कभी नहीं
केंद्र सरकार के मॉडल रूल में चिकन और अंडे का प्रावधान है, लेकिन मप्र में चिकन, अंडे के बजाय शाकाहारी मेन्यू चलाया जा रहा है, क्योंकि प्रति बच्चे का बजट कम है। 2015 के नियम में भी यह शामिल था, लेकिन परोसा कभी नहीं गया। इस बार जो अधिसूचना जारी हुई है, उसमें भी प्रमुखता से इसे शामिल किया गया है। मप्र में 2160 रुपए प्रतिमाह एक बच्चे पर खाने का खर्च आता है।

विभाग ने तय कर दिया मेन्यू
महिला एवं बाल विकास विभाग ने मप्र किशोर न्याय नियम की अधिसूचना में इसे शामिल किया है। संभवत: यह पहली बार है कि इस तरह के मानक तय किए गए हैं। इसकी अधिसूचना 25 अगस्त को जारी हुई है। इस फैसले के बाद सरकार में ही विवाद मच गया है।

यह होगा भोजन का मेन्यू
दाल, राजमा, चना, नाश्ते में दूध, पत्तेदार सब्जियां, दही या छाछ, सप्ताह में एक बार 115 ग्राम चिकन या चार दिन अंडे, गुड़-मूंगफली या पनीर 100 ग्राम, स्वीट डिश, चाय या कॉफी, सूजी या पोहा, खिचड़ी और ब्रेड। मसाले भी पर्याप्त होंगे। अरहर, मूंग, हरे चने या काबुली चना भी मिलेगा।

मेथी, पालक, सरसों के साग के साथ सप्ताह में एक बार पत्तेदार सब्जियां देनी होंगी। यदि किसी संस्था के पास जमीन है तो वह इन सब्जियों को उगा भी सकेगी। मौसमी फल भी मिलेंगे। दिन में चार बार खाना मिलेगा।

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