November 26, 2022
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पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति मामले में आरोप-पत्र दाख़िल

सीबीआई ने आरोप लगाया कि द्रमुक नेता ए. राजा ने मंत्री पद पर रहने के दौरान 5.53 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी, जिसमें उस कंपनी को मिली 4.56 करोड़ रुपये की रकम भी शामिल है, जिसमें उनके क़रीबी रिश्तेदार निदेशक थे.

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता ए. राजा के केंद्रीय मंत्री रहते हुए कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक 5.53 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने के मामले में उनके खिलाफ एक आरोप-पत्र दाखिल किया है.

अधिकारियों ने बताया कि चेन्नई में सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल आरोप-पत्र में एजेंसी ने आरोप लगाया है कि राजा के करीबी सहयोगी सी. कृष्णमूर्ति ने जनवरी 2007 में कोवई शेल्टर्स प्रोमोटर्स कंपनी बनाई और उस साल फरवरी में कांचीपुरम में एक जमीन खरीदने के लिए कमीशन के तौर पर गुड़गांव की एक रियल एस्टेट कंपनी से उसे 4.56 करोड़ रुपये की रकम मिली.

उन्होंने बताया कि ऐसा आरोप है कि यह रकम जमीन सौदे के लिए नहीं मिली, बल्कि राजा के केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान रियल एस्टेट कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का दर्जा देने के बदले में मिली.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस साल अगस्त में दायर आरोप-पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने रियल एस्टेट फर्म के लिए कथित भूमि सौदे के अलावा ‘कोई अन्य अचल संपत्ति गतिविधि नहीं की थी’.

कंपनी ने बाद में कोयंबटूर में कृषि भूमि खरीदी थी.

सीबीआई ने आरोप लगाया कि राजा ने मंत्री पद पर रहने के दौरान 5.53 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जिसमें उस कंपनी को मिली 4.56 करोड़ रुपये की रकम भी शामिल है, जिसमें उनके करीबी रिश्तेदार निदेशक थे.

अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने आरोप लगाया कि राजा की आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति उनकी आधिकारिक संपत्ति से 579 प्रतिशत अधिक है.

सीबीआई ने 2015 में राजा तथा 16 अन्य लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था, जिसमें उनके भतीजे परमेश, पत्नी परमेश्वरी, उनके सहायक कृष्णमूर्ति और राजा के कथित सहयोगी सादिक बाशा की पत्नी और ग्रीनहाउस प्रमोटर्स में एक निदेशक रेहा बानो शामिल हैं. ग्रीनहाउस प्रमोटर्स पहले बाशा के स्वामित्व में थी. बाशा ने आत्महत्या कर ली थी.

सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले के संबंध में भी पूर्व दूरसंचार मंत्री राजा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन एक विशेष अदालत ने साल 2017 में उन्हें बरी कर दिया था, क्योंकि एजेंसी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई थी.

उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार में दूरसंचार मंत्री रहे ए. राजा को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का चेहरा माना जाता था, जो तत्कालीन नियंत्रक और महालेखा परीक्षक विनोद राय के इस दावे के बाद सामने आया था कि 2007-08 में 2जी आवंटन प्रक्रिया के कारण सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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