November 26, 2022
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक कर्नाटक के स्कूलों-कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध रहेगा: मंत्री

बेंगलुरु/नई दिल्ली: कर्नाटक के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का स्कूल और कॉलेज परिसरों में हिजाब पर राज्य सरकार के प्रतिबंध को बरकरार रखने का आदेश इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के विभाजित फैसले के बाद भी वैध बना रहेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध हटाने से इनकार करने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक खंडित फैसला सुनाया था.

जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया, जबकि जस्टिस सुधांशु धूलिया ने इसकी अनुमति दी थी.

मंत्री बीसी नागेश ने संवाददाताओं से कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया भर में हिजाब और बुर्का के खिलाफ आंदोलन हो रहा है और महिलाओं की स्वतंत्रता चर्चा का विषय है, कर्नाटक सरकार को एक बेहतर निर्णय की उम्मीद थी, जो शिक्षा प्रणाली में एकरूपता लाता, लेकिन एक विभाजित फैसला आया.

नागेश ने कहा कि मामला अब उच्च पीठ को भेज दिया गया है और कर्नाटक सरकार उच्च पीठ के फैसले का इंतजार करेगी.

नागेश ने कहा, ‘कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश मान्य रहेगा. ऐसे में हमारे सभी स्कूलों और कॉलेजों में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम और नियम में किसी भी धार्मिक प्रतीकों के लिए कोई गुंजाइश नहीं होगी. इसलिए हमारे स्कूल और कॉलेज कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार चलेंगे. बच्चों को उसके अनुसार स्कूलों में आना होगा.’

नागेश ने कहा, ‘हिजाब पर प्रतिबंध जारी रहेगा. जैसा कि आप जानते हैं कि कर्नाटक शिक्षा अधिनियम और नियम कक्षा के अंदर किसी भी धार्मिक वस्तु की अनुमति नहीं देते हैं. इसलिए हम बहुत स्पष्ट हैं कि कोई भी छात्रा कक्षा के अंदर हिजाब नहीं पहन सकती है.’

कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा कि उन्होंने मीडिया में हिजाब का फैसला देखा है, जहां एक न्यायाधीश ने याचिका खारिज कर दी, जबकि दूसरे ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है.

ज्ञानेंद्र ने संवाददाताओं से कहा, ‘यह एक खंडित फैसला है और मामला प्रधान न्यायाधीश की पीठ के पास गया है. यह प्रधान न्यायाधीश के फैसले पर निर्भर करेगा. कर्नाटक सरकार प्रधान न्यायाधीश के आदेश का इंतजार कर रही है.’

उल्लेखनीय है कि हिजाब को लेकर यह विवाद उडुपी जिले के एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में सबसे पहले तब शुरू हुआ था, जब छह लड़कियां दिसंबर 2021 में हिजाब पहनकर कक्षा में आईं और उन्हें कॉलेज में प्रवेश से रोक दिया गया.

उनके हिजाब पहनने के जवाब में कॉलेज में हिंदू विद्यार्थी भगवा गमछा पहनकर आने लगे और धीरे-धीरे यह विवाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैल गया, जिससे कई स्थानों पर शिक्षण संस्थानों में तनाव का माहौल पैदा हो गया था.

फरवरी 2022 में कर्नाटक सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में समानता, अखंडता और लोक व्यवस्था को बाधित करने वाले कपड़े पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. छात्राओं ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करके कक्षा के भीतर हिजाब पहनने का अधिकार दिए जाने का अनुरोध किया था.

शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब को लेकर उपजे विवाद से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए 15 मार्च 2022 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है.

उसने कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने संबंधी मुस्लिम छात्राओं की खाचिकाएं खारिज कर दी थीं और राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध बरकरार रखा था.

उसी दिन इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट में 10 दिन तक चली बहस के बाद शीर्ष अदालत ने 22 सितंबर को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था.

कर्नाटक सरकार हिजाब से जुड़ा आदेश वापस ले: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हिजाब मामले में सुप्रीम कोर्ट का खंडित फैसला आने के बाद बृहस्पतिवार को कहा कि कर्नाटक सरकार को शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर रोक से जुड़े अपने आदेश को वापस लेना चाहिए, ताकि यह पूरा विवाद खत्म हो सके.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने यह भी कहा कि जस्टिस सुधांशु धूलिया का आदेश संविधान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सिद्धातों के अनुरूप है.

उन्होंने एक बयान में कहा कि जस्टिस धूलिया ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और उनकी शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने कहा कि इस पहलू का स्वागत किया जाना चाहिए, हालांकि जस्टिस हेमंत गुप्ता के फैसले में यह पहलू गायब था.

रहमानी ने कहा, ‘कर्नाटक सरकार से आग्रह है कि वह हिजाब से जुड़े आदेश को वापस ले. अगर कर्नाटक सरकार यह आदेश वापस ले लेती है तो पूरा विवाद स्वत: खत्म हो जाएगा.’

उनका कहना था कि सरकार को ऐसे किसी कदम का समर्थन नहीं करना चाहिए, जो लड़कियो की शिक्षा के रास्ते में रुकावट पैदा करे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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